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रसभरा मौसम/ माया कौल

सखी सुना है राधा के प्रीतम गांव में आये हैं कितनी गर्मी का मौसम है राधा के मन की खिड़की से देखा हर तरफ बहार

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लघुकथा- चैट-.युद्ध

डॉ. चंद्रा सायता लघुकथा एक साहित्यिक कार्यक्रम की प्रकाशित रिपोर्ट को वाट्सएप पर फारवर्ड किया गया।यही रिपोर्ट समूह दर समूह वायरल होती रही । मि.

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72 बसंत में 72 कविताओं का संग्रह : बोल लेखनी कुछ तो बोल

भयावह समय बदला रचनात्मक काल में इंदौर। डॉ. अंजुल कंसल ने कोरोना काल के भयावह समय को अपनी लेखनी से रचनात्मक काल में बदल दिया।

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मेरे पापा मेरी जिंदगी थे

सुरेखा सरोदे, बाबा आज तुम, बहुत याद आ रहे हो आँखों से बहती अश्रुधारा को मोती बनकर बरसा रहे हो l बताओ ना बाबा इतना

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वामा

रश्मिता शर्मा, वामा….…. आया समय , उठो तुम वामा नर की प्रबल-प्रेरणा बन हर बाधा को हरना है। चार-दीवारी के बंधन तोड़ युग परिवर्तन तुम्हें

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” मेरी माँ “

दुर्गेशनंदिनी चौधरी, सीधी सरल  मेरी माँ, पानी सी तरल मेरी माँ। जलेबी सी नहीं मेरी माँ, हाँ उसकी चाशनी सी मीठी मेरी माँ बातों के

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समीक्षा/ किताब:- मैं अहिल्या हूँ

लेखिका :- रंजना फतेहपुरकर प्रकाशन :-HSRA PUBLICATION मूल्य :- 150 /- मो नंबर :-9893034331 एक वीरांगना  की गौरव गाथा वरिष्ठ साहित्यकार रंजना फतेहपुरकर का  ओजपूर्ण

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पुस्तक समीक्षा: युगंधर: शिवाजी सावंत कृत

मनकही जब मनकही के लिए किसी पुस्तक को आप सबसे बांटने को विचार आया ,जो पहला भाव था वह शिवाजी सावंत द्वारा रचित श्री कृष्ण

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बुकर पुरस्कार: हिंदी का वैश्विक सम्मान

मीना गोदरे ,अवनि  भारत की व्यवस्थाओं में स्त्री के दर्द को उकेरा मैं गर्व के साथ लेखिका गीतांजलि श्री को उपन्यास  “रेत समाधि” बुकर पुरस्कार

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मैं अदिति में आने वाले समय को देखता हूँ- प्रेम जनमेजय

प्रेम जनमेजय अदिति का कहना है –कविता हमारी नहीं सबकी हो ” कुछ समय पूर्व इंदौर की युवा लेखिका अदिति सिंह भदौरिया की पहली पुस्तक