प्रभा तिवारी

सबसे पहले गुरु हमारे मां बाप होते है वो हमें ज्ञान संस्कार देते है

उन्हें बारम्बार प्रणाम करती हूँ

दुसरे गुरु  हमारे विधार्थी जीवन के जो विद्या, शिक्षा बुद्धी का विकास में सहायक होते हैं।

तीसरे गुरु धर्म गुरु आध्यात्मिक गुरु होते हैं जो जीवन के मूल्यों से अवगत कराते हैं।

आज उन सबको बहुत बहुत नमन करती हूं।

हमारे  स्कूल के विद्यार्थी जीवन के शिक्षक जो हमारी बुनियादी नीव को मजबूत बनाते हैं।उन्ही के मार्गदर्शन से हमारी बुद्धि का विकास होता है ।गुरु के सानिध्य में उनके आशीर्वाद से ही हम जीवन में एक के बाद एक सीढ़ी चढ़कर कामयाबी को चूमते हैं। गुरु एक तेज है जिसके आते ही अंधकार खत्म हो जाते है।

गुरु सोए हुए भाग्य को जगाता है गुरु सर से हजारों बलाएँ टालता है। गुरु ही मृदग है, जो जीवन की धारा को सही मोड़ पर ले जाता है.. गुरू ही दुख- सुख में सामंजस्य की परिभाषा समझाते है। गुरु वो नदी है जो हमारी सासों को अक्षुण्णय बनाये रखते हैगुरु वो दीक्षा है जो सही मिल जाती है तो पार हो जाते है। गुरु ही वो आंनद है जो हमें पहचान देता है।

उन्हीं के आशीर्वाद से मेरी लेखनी मेरे हाथ में आई ओर कलम चल पड़ी।मुझे नासमझ को समझदार बना दिया

मेरे गुरु ने मुझको लिखने- बोलने के काबिल बना दिया।  मेरे गुरु के साथ मेरे माता पिता व अब तक जो भी मेरे जीवन में आए जिसने मुझे राह दिखाई उन सब को बहुत-बहुत नमन

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