डॉ. प्रतिभा जैन

(होम्योपैथ डॉक्टर, लेखिका, अष्टमंगल  मेडिटेशन शिक्षिका होने के साथ ही “मन की थाह” नाम से लोकप्रिय पॉडकास्ट भी करती हैं।)

मन का डीटॉक्स   कैसे करें ?

 हम स्वयं के तन का  डीटॉक्स  करने हेतु विभिन्न प्रयास करते हैं  ताकि  पित्त , एसिडिटी ,अपच,आदि  रोगों का निवारण हो सके; किन्तु मानसिक एसिडिटी के डीटॉक्स का  क्या  ? उसे कैसे  करना है ? जरा सोचा है इसके बारे में  ? कदाचित् , आप उत्तर देंगे  ‘मेडिटेशन’ द्वारा । हमम्म्म् …. हाँ, यह भी एक उपाय  है ,परंतु इससे कुछ समय के लिए ही शांति प्राप्त होगी  और फिर वही बैचैनी !   ऐसा इसलिये  ,क्योंकि जो पित्त,ऐसिडिटी, गंदगी विचारों में व्याप्त  है ,जैसे-  पुरानी खट्टी व कड़वी यादें , किसी के प्रति गुस्सा, नफ़रत , बदला लेने की भावना , किसी के साथ बुरे अनुभव … आदि ,यह सभी  यादें अभी भी मन को गठ्ठा जकड़े हुए है । 

इन बुरे मनोभावों से मुक्त  होने का एकमात्र विकल्प है  क्षमा माँगना तथा  क्षमा देना । यह  कार्य एक तेज़ गतिशील  रोलर कोस्टर सवारी की भाँति  है- एक ऐसी सवारी जिसपर आप सवार होना  चाहते हैं ,परंतु हिम्मत नहीं है  ।मन में उथल-पुथल चलती रहती है – अहंकार की, ईगो की अथवा अकड़ की,  कि “मैं कैसे क्षमा कर  दूँ या कैसे क्षमा माँग लूँ !”   लेकिन ,  हिम्मत करके जब  आप उस कठिन  सवारी  पर बैठ जाते हैं ,  तब  उस सवारी के पश्चात ऐसी  संतुष्टि व खुशी प्राप्त होती  है जैसे आपने कोई रण जीत लिया ही ; ठीक वैसे ही , जब आप हिम्मत करके माफी देते अथवा माँगते  हैं , तब आपके चित्त को  निर्मल आनन्द  प्राप्त होगा , तद्पश्चात जो अश्रु बहेंगें, वह   आपसी रंजिश की सारी  धूल को धो देंगें जिससे  आपके रुठे रिश्तें  चमक उठेंगें ..यही डीटॉक्स है अंतर्मन का जिसे  कम-स-कम वर्ष  में एक बार तो अवश्य  करना ही चाहिए ।

1 Comment

  • Sonali Choubey, August 31, 2022 @ 1:06 pm Reply

    So true n beautifully written 👌👌

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