महिमा वर्मा ( न्यूयॉर्क से)

अब मेरी किसी जगह को देखने की परिभाषा बदल गई है|पहले यह होता था कि प्रसिद्ध जगहें देखी जाएँ पर अब ऐसा लगता है किसी भी जगह की विशेष चीजों का अनुभव लिया जाये,…ऐसा कुछ हो जो भावों को भी हौले से सहला जाये,…जिन बातों ने उस जगह की रूह को बनाए रखा है उसे महसूस किया जाये,…उस पल को जिया जाये…….हरदम ऐसे पलों के इंतज़ार में…….

न्यूयॉर्क,द बिग एपल,… दुनिया भर के टूरिस्ट्स के आकर्षण के केंद्र में तमाम आकर्षित करने वाली चीजों के अलावा एक और चीज है मैं जिसका अनुभव लेना चाहती थी और वह थी ‘ब्रॉडवे|कह सकते हैं यह थियेटर या नृत्य नाटिका का विस्तृत रूप हैं|किसी भी कहानी को म्यूज़िकल रूप में किरदारों द्वारा लाइव परफॉर्म किया जाता है,स्पेशल इफ़ेक्ट्स भी रहते हैं|अमेरिका में ये बहुत लोकप्रिय हैं और क्लासिक्स पर ब्रॉडवे बन चुके हैं|तुलनात्मक रूप से नये लोकप्रिय उपन्यासों पर भी बन चुके हैं जैसे ‘हैरी पॉटर|तो इस बार की न्यूयॉर्क ट्रिप का मुख्य उद्देश्य ब्रॉडवे देखना ही था|यह प्लान बहुत पहले ही बन गया था क्योंकि टिकिट्स बहुत पहले से बुक करने होते हैं|अब शुरू हुई ब्रॉडवे देखने की तैयारी|सोचा टी वी में एक म्यूज़िकल देख लिया जाये क्योंकि मुझ जैसी बॉलीवुड फ़ैन देसी इंदौरी महिला को तो ब्रॉडवे कैसा होगा कुछ आइडिया नहीं था|चूंकि मुझे ‘गली बॉय’ पिक्चर बहुत अच्छी लगी थी तो बेटे ने कहा आप ‘हैमिल्टन’देखो सब टाइटल्स के साथ, रैप स्टाइल में पूरा म्यूज़िकल है|पता चला जब हैमिल्टन आया था तब डेढ़ से दो साल की टिकिट्स की वेटिंग थी और इसके  प्रदर्शन के बाद सारे कलाकार सुपर स्टार बन गए थे,आज भी इतने सालों बाद भी भिन्न कलाकारों के साथ हैमिल्टन का हर शो हाउस फुल जाता है और अभी भी टिकिट्स आसानी से नहीं मिलते|तो भई बस हम डिज़्नी पर  हैमिल्टन देखने बैठे…. और मैं तो उसमें बहते हुए कभी डूबती कभी उतराती रही|अमेरिकन हिस्ट्री के बारे में कुछ खास न जानने के बावजूद इस शो ने मुझे इस कदर बांधा कि कई दिनों तक उसका खुमार ही नहीं उतरा और इसी के साथ साथ न्यूयॉर्क जाकर प्रत्यक्ष रूप से ‘हैरी पॉटर एण्ड द कर्स्ड चाइल्ड’देखने की प्रतीक्षा भी तीव्र हो उठी|

इस बार बोस्टन से न्यूयॉर्क बेटेजी ट्रेन से ले गए|इसका विशेष कारण यह था कि ट्रेन न्यू इंग्लैण्ड एरिया से गुजरती है जो कि बहुत ही सुंदर है|चार घंटे का सफर था|ट्रेन शब्द सुनकर ही मेरा भारतीय दिमाग और दिल ओवर एक्टिव हो गया रास्ते के लिए खूब सैंडविच वगैरह बनाकर रख लिए|यह ट्रेन दो स्टेट्स रोड आइलैण्ड और कनेक्टीकट जो कि न्यू इंग्लैण्ड एरिया में आते हैं में से गुजरती हुई न्यूयॉर्क पहुँचती है|सभी स्टेशन्स के नाम वाकई में इंग्लैण्ड की ही याद दिलाते हैं जैसे वेस्टवुड,न्यू लंदन,न्यू हेवन,स्टेमफोर्ड|न्यू हेवन में विश्व प्रसिद्ध विश्वविद्यालय ‘येल’ है|ये सभी जगहें खाड़ी के मुहाने पर बसी हुई हैं और प्राकृतिक सौंदर्य से नवाज़ी हुई हैं|हरा,नीला,पीला,सुनहरा रंग हर ओर जैसे बिखरा हुआ था और उसमें खूबसूरत से घर ऐसे नयनाभिराम दृश्य  देखते हुए कब न्यूयॉर्क पहुँच गए पता ही नहीं पड़ा|…

ब्रॉडवे के अतिरिक्त हमारा न्यूयॉर्क आने का एक और आकर्षण था,हम दोनों माँ-बेटा ठहरे फूडी ऊपर से इंदौरी|यहाँ हर तरह का बहुत ही शानदार खाना मिलता है|आने से पहले खूब ‘गूगल’किया गया था,लोगों से रेफरेंस लिए गए थे,नाश्ते से डिनर तक की तैयारी टीम इंदौर द्वारा की गई थी|चूंकि हम लोग बहुत सालों तक चेन्नई में रहे हुए हैं तो ‘सरवणा भवन’ के खाने में ‘भी’में हम लोगों के प्राण बसते हैं|बेटे को तो दस दिन पहले से ही वहाँ के डोसे और वड़ों के सपने आ रहे थे|हम सीधे पहुंचे लेक्सिंग्टन स्ट्रीट,वहाँ लगा भारत में हैं| कैलाश पर्वत,पंजाबी ढाबे क्या नहीं है वहाँ |भारतीय खाने-पीने की जगह का स्वर्ग|हमें जो टैक्सी वाले मिले वे भी पंजाबी या पाकिस्तानी थे|

चूंकि न्यूयॉर्क में इतनी ज्यादा देखने की चीजें हैं और दूरियाँ भी जैसे ‘स्टेचू ऑफ लिबर्टी’ कि हम पिछली  यात्राओं के दौरान एक खास जगह नहीं जा पाये थे| ‘टॉप ऑफ द रॉक’या ‘द एज’ऐसी ऊंची बिल्डिंग्स हैं जहां से पूरे न्यूयॉर्क की स्काइलाइन नज़र आती है|तो हम लोग ‘द एज’ गए यह हिस्सा हडसन यार्ड कहलाता है|सौंवी मंजिल से न्यूयॉर्क को देखना एक अलग ही अनुभव था वहाँ से ‘एम्पायर स्टेट बिल्डिंग’भी साफ दिख रही थी|पास ही एक और आर्किटेक्चर वंडर ‘वेसल’नाम की बिल्डिंग है|न्यूयॉर्क आसमान से बातें करती इमारतों का शहर है|

अब हमारा मुख्य एजेंडा ‘ब्रॉडवे’ये सारी जगहें मैन्हट्टन में ‘टाइम्स स्क्वेयर’ के पास ही हैं|टाइम्स स्क्वेयर में हमेशा की तरह लोगों का अथाह समुंदर|दुनिया के हर देश की भाषा जैसे वहाँ कानों में पड़ रही थी|हम ब्रॉडवे पहुंचे,वहाँ जैसे एक उत्साह और ऊर्जा की तरंगें प्रवाहित हो रही थीं|लगभग पौने दो हजार लोग वहाँ बैठ सकते हैं|देखते ही देखते पूरा हॉल हाउस फुल हो गया|शो में तस्वीरें लेना मना था।फिर अगले तीन घंटे तो जैसे स्वप्नलोक में बीते|कलाकारों का अभिनय,डायलॉग्स, कोरियोग्राफी,प्रॉप्स,स्पेशल इफ़ेक्ट्स सब कुछ बेहतरीन| ब्रॉडवे इंडस्ट्री से जुड़ा हर शख्स किस पैशन से अपने अपने कार्य को अंजाम देता होगा साफ दिख रहा था|हम तो हैरी पॉटर की दुनिया में ही पहुँच चुके थे, हॉगवर्ड्स मैजिक स्कूल में जैसे सब कुछ हमारे सामने घटित हो रहा था|अचानक से मशालें जलना,या दुष्टात्माओं  का आसमान में हमारे सिर के ऊपर लटकना,अचानक से किसी पात्र का रूप परिवर्तित हो जाना,धुएँ में उड़ जाना यहाँ तक की पानी में कूद कर गायब हो जाना या अचानक से पानी में से प्रगट हो जाना,हम पर भी पानी के छींटे पड़े|जिसको कहते हैं न ‘मंत्रमुग्ध’या ‘स्पेलबाउंड’हो जाना|मेरे लिए तो यह अनुभव अवर्णणीय और अविस्मरणीय है|अंत में जब पूरी स्टार कास्ट स्टेज पर आई तो तालियों की गड़गड़ाहट थमने का नाम ही नहीं ले रही थी, साथ ही उनको स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला|ऐसा लग रहा है अनुभवों के खजाने में एक और कीमती रत्न संग्रह हो गया है|

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