सखी सुना है राधा के प्रीतम गांव में आये हैं कितनी गर्मी का मौसम है

राधा के मन की खिड़की से देखा

हर तरफ बहार का

फूलों का रंगों का

मौसम है

मौसम एक ही गांव के हैं

राधा भी वहीं गोपी भी वहीं

क्या प्रियतम मौसम बदल देते हैं

या सबके प्यारे बहार

फूल रंग साथ लिए चलते हैं

मौसम भी बहुमुखी सा कुछ

कुछ कुछ नादान सा

कुछ कपटी सा

जाने कैसा हो गया है,

मन और मौसम दोनों

समझ के परे हैं

2 Comments

  • संगीता शाह, July 21, 2022 @ 6:34 am Reply

    मौसम सा मन महक उठा,राधा सा मन बहक गया,
    गोपियों सा जैसे चहक उठा,बेरी मनवा ठुमक गया,
    संगीता

  • रागिनी शर्मा, July 22, 2022 @ 6:21 pm Reply

    बहुत सुंदर

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