रोमांचकारी अनुभव

मंजुला भूतड़ा 

यूं तो अमेरिका यात्रा अनेकों बार जाना हुआ। वहां बच्चे जो बसे हुए हैं । बड़ा बेटा अभय अटलांटा में और छोटा बेटा अजय कैलिफोर्निया में रहता है। बहुत सी दर्शनीय, नामचीन तथा विशिष्ट जगहों पर भी घूमने जाना होता रहा है। यह भी सच है कि इतने विशाल देश में सब कुछ देख पाना असम्भव ही है।

कोरोना के पूर्व जब अमेरिका गये थे, तब बच्चों और कुछ परिवारों के साथ हम लोग जार्जिया के अटलांटा शहर से लगभग चार सौ मील दूर फ्लोरिडा के “पनामा सिटी बीच” गये। विशाल किनारा और उठती उत्ताल लहरों को देखना हमेशा ही अच्छा लगता है। संसार के विभिन्न बड़े-बड़े बीच पर जाना तरह तरह के अनुभव महसूस करना यानी प्रकृति की अनुपम छटा निहारने का सुकून पाना ही तो है।

पनामा सिटी बीच के नजदीक होटल में हम लोग तीन दिन रहे। प्रथम दिवस पहुंचे तो तुरन्त समुद्र के किनारे चले गए, लहरों के बीच जाने का उस दिन सोचा नहीं था। क्योंकि शाम हो चली थी और सूर्यास्त भी होने को था। परंतु किनारे पहुंच कर रुक नहीं सके और पानी की लहरों के बीच खड़े हो गए। विशाल अटलांटिक महासागर का जल अंजुलि में भरकर बड़ा गर्व महसूस हो रहा था। समुद्र देव को प्रणाम किया, सूर्यास्त का अलौकिक नजारा देखा।

दूसरे दिन हम तीन परिवार के सभी सदस्य साथ में पूरा दिन बीच पर ही बिताएंगे इस मंशा से पूरी तैयारी से चल दिए। हमने समुद्र के किनारे अपने तंबू गाड़ दिए। परन्तु, जब समुद्र के करीब पहुंचे तो देखा कि पूरी जल राशि में वनस्पति ही वनस्पति है लहरों के थपेड़ों से गल रही है और समुद्र का पानी गंदा सा हो चुका है। किसी का पानी में जाने का मन ही नहीं हुआ। महासागर की अथाह जल राशि में इस तरह वनस्पति का आ जाना बहुत अजीब लग रहा था। कल तो यह सब दृश्य नहीं था। वहां रहने वाले लोगों ने बताया कि वर्ष में एक बार गर्मी में इस तरह की घटना होती है लेकिन हमारे लिए यह एकदम नया अनुभव था।

हम लोग किनारे पर ही बैठे, वहां की सफेद रेत में घरौंदे बनाते तीन-चार घंटे बिता कर पुनः होटल लौट आए।

दूसरे दिन जाकर देखा तो वनस्पति अब और अधिक सड़ गल चुकी थी और पानी और भी अधिक गंदा हो चुका था। अतः सभी पनामा सिटी बीच से लगभग 15 मील दूर ‘सेंट एंड्रयू पार्क बीच’ पर यह सोच कर गए कि वहां पानी में जाने का आनंद ले सकेंगे। लेकिन वहां की स्थिति और नजारा और भी डरावना सा था। वहां का पानी तो एकदम काला लगभग ब्लैक टी  जैसा दिखाई दे रहा था। लहरों में जाना तो दूर,मन ही कसैला हो गया था।  समुद्र की उठती लहरें काली सी हो,कल्पनातीत है।

सैकड़ों लोग किनारे से ही इस अजीब से दृश्य को देख रहे थे। वहां भी जानकारी मिली कि जब समुद्र में ‘वीड’ आती है तो यह पानी इस तरह ही दिखाई देता है। विभिन्न जगहों पर समुद्र का यह भिन्न भिन्न रूप कुछ दिनों में सामान्य हो जाता है।

दुनिया के अनेक बीचों पर जाने के अलग अलग अनुभव मिले हैं। अमेरिका के नॉर्थ केरोलाइना के ‘मिर्टल बीच’ की खूबी है कि वहां की सफेद रेत है और उस में पांव धंसते ही नहीं है।

सफेद रेत का बहुत सुन्दर नयनाभिराम दृश्य।

इसी तरह कैलिफोर्निया का ‘हंटिंगटन बीच’ देखा।यह खूबसूरती के लिए जाना जाता है।

आस्ट्रेलिया का ‘गोल्ड कोस्ट बीच’ जो करीब 75 किलोमीटर लंबा है और महीन सुनहरी रेत से ढका हुआ है। मन करता है, इस मनोहारी दृश्य को निहारते रहो,बस चलते जाओ। वहां की रेत में कोई तिनका,कचरा या कंकर आदि जरा भी नहीं है।बस मुलायम रेत का चमकता सुन्दर बीच। इस बीच पर हमें हमेशा रेत को छानते हुए लोग भी दिखे। यहां प्रशांत महासागर है। यहीं पर दुनिया का सबसे बड़ा ‘कोरल आईलैंड’ है यानि 8 किलोमीटर लंबा दुनिया का अजूबा ‘ग्रेट बैरियर रीफ’ ग्लास बॉटम बोट में बैठ कर जाना, उस समुद्र के अंदर के कोरल ,जीव, वनस्पति अनेक विचित्रताएं देखना हमारे लिए अद्भुत और चमत्कारी अनुभव रहा।

GOLD COAST BEACH

ऑस्ट्रेलिया में ही एक ‘बोंडई बीच’ है जहां समुद्र की लहरें अर्धगोलाकार आकार में आती हैं।

इसी तरह न्यूजीलैंड गये, जो पूरी तरह समुद्र से घिरा हुआ है।लेकिन वहां बीच नहीं हैं क्योंकि वहां चट्टानें ही चट्टानें हैं। समुद्र के अन्दर ही कितनी विविधता है।

भारत के भी अनेक समुद्र तट अनेक विविधता लिए हुए हैं। मुंबई का ‘जुहू बीच’ ऊंची उठती लहरों को देखने या यूं सैर सपाटा करने वाले लोगों से भरा रहता है तो दक्षिण में रामेश्वरम धाम के सामने वाला समुद्र तट एकदम शांत,ठहरा हुआ सा ही रहता है। वहां ज्वार भाटा जैसा नजारा देखने को नहीं मिलता। भारत में केरल के ‘कोवलम बीच’ भी गये जो कि प्रकृति के अनुपम सौंदर्य का उदाहरण है।

संसार में अनेक महासागरों के अनेकों बीच देखने का अवसर मिला परन्तु ‘पनामा सिटी बीच’ में सामुद्रिक वनस्पति अर्थात ‘वीड’ का इस तरह रातों रात समुद्र में आ जाना और उस दौरान हमारा वहां जाना हमारे लिए अद्भुत अनुभव है,साथ ही एक महत्वपूर्ण नयी जानकारी भी।

2 Comments

  • मंजुला भूतड़ा, इन्दौर, June 16, 2022 @ 5:53 am Reply

    धन्यवाद संध्या जी

  • Madhu Modi, June 16, 2022 @ 11:07 am Reply

    अत्यंत मनोहारी विवरण! रोचक !
    सच है हर स्थान पर लोगों की लापरवाही का ख़ामियाज़ा प्रकृति को भुगतना पड़ रहा है। थोड़ी -सी सावधानी, थोड़ा – सजग व्यवहार इस पृथ्वी को रहने लायक़ बनाए रख सकता है।🙏🙏🙏🙏
    😊😊

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