महिमा वर्मा ( बोस्टन से)

मेरे बोस्टन पहुँचने के साथ ही प्लान बनने शुरू हो गए कि कहाँ-कहाँ जाना है|इस बार ये सोचा गया कि सारे टूरिस्ट स्पॉट्स तो बहुत बार देखे हुए हैं अब शहर को विशेष बनाने वाली स्ट्रीट्स या ऐसा कुछ जो पहले नहीं किया हो वो किया जाये|दूसरे दिन रविवार की छुट्टी की वजह से बेटा सुबह आठ बजे ही बोलने लगा चलिये आपको स्पेशल कॉफी औए शानदार ब्रेकफ़ास्ट खिलाता हूँ और हम निकल पड़े ‘नॉर्थ एंड’की ओर|अब नॉर्थ एंड की थोड़ी सी कहानी बता दूँ|नॉर्थ एंड बोस्टन का वह इलाका है जहां अधिकतर इटैलियन्स रहते हैं|1820 से और उसके बाद तक बहुत इटैलियन्स अमेरिका माइग्रेट हुए और एक बड़ी संख्या में बोस्टन में भी सेटल हुए|आयरिश माइग्रेंट्स के बाद बोस्टन में सबसे बड़ी संख्या इटैलियन्स की है और इनमें से अधिकतर नॉर्थ एंड में सेटल हुए|इसे लिटिल इटली भी कहा जाता है|

वहाँ पहुँचते ही इस स्ट्रीट के ओल्ड वर्ल्ड चार्म ने मन को प्रसन्न कर दिया,हेरिटेज बिल्डिंग्स,बिलकुल यूरोप जैसी पत्थर लगी हुई छोटी छोटी सुंदर गलियाँ,इस एक स्ट्रीट में सौ से अधिक रेस्तरां,पब,फ़ाइन डाइनिंग रेस्तरां,और authentic इटैलियन ग्रोसरी की दुकानें मौजूद हैं|इन्हीं में से एक गली में अमेरिकन क्रान्ति के हीरो पॉल रेवर का घर भी है जिसके सामने खड़े होकर मैंने फोटो भी खिंचवा ली| बहुत सारे रेस्तरां,दुकानों के साथ कहानियाँ भी जुड़ी हुई हैं|एक ग्रोसरी स्टोर में लियोनार्डो दा विंची शूटिंग करने आए थे फिर उनने उसके बाद बाद एक बड़ी पार्टी दी और उस ग्रोसरी स्टोर का सारा सामान खरीद लिया आदि आदि|लगभग हर दुकान किसी न किसी चीज के लिए प्रसिद्ध है|बेटा मुझे एक छोटी सी बेकरी में ले गया और वहाँ की एक स्पेशिलिटी डिश सुलितेला,जो कि एक पेस्ट्री है जिसके अंदर रिकोटा चीज़ और ऑरेंज ज़ेस्ट भरा रहता है बहुत प्रसिद्ध है और जो बनने के तीन चार घंटे के अंदर ही खत्म हो जाती है, (बिल्कुल विजय चाट हाउस के खमण की तरह)|वाकई में बहुत स्वादिष्ट थी|अब बारी आई इटैलियन कॉफी की,उसके लिए हम फिर किसी खास दुकान पर गए|हमारे देखते ही देखते कॉफी और ब्रेकफ़ास्ट के लिए लाइन लगना शुरू हो गईं|मुझे तो यह स्ट्रीट बहुत कुछ अपने इंदौर के सराफा की याद दिलाती रही|कैसे इतनी दुकानें एक ही क्षेत्र में, और सब प्रसिद्ध,और आज से नहीं, अधिकतर परिवार के सदस्य ही उन्हें चला रहे हैं|हम इंदौरियों की तरह खाना इटैलियन्स का भी पैशन है|

यहाँ कई परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं| स्ट्रीट में इटैलियन भाषा बहुत सुनाई पड़ रही थी|जब इटली ने फुटबाल में वर्ल्ड कप जीता था पूरी स्ट्रीट सज गई थी जिसे उस  समय बहुत न्यूज़ कवरेज भी मिला था|कोविड काल के बाद से हर दूकान के आगे आउटडोर सिटिंग भी हो गई है|एक दुकान के सामने धूप का एक टुकड़ा  एंजॉय करते हुए कम से कम दस बारह इटैलियन दादाजी लोगों की गोष्ठी हो रही थी और शायद कुछ बहुत ही मजेदार टॉपिक चल रहा था कम से कम ठहाकों की आवाज़ से तो ये ही लगा|पता लगा ये लगभग रोज का कार्यक्रम है|मुझे तो  भारत की याद आ गई|

तो नॉर्थ एंड के टूर ने चित्त को खुशी से भर दिया|एक शहर को बड़ी बड़ी बिल्डिंग्स,होटेल्स ,मॉल्स,बड़ा शहर नहीं बनाती हैं,बल्कि ऐसी मानवीय चीजें,जैसे बोस्टन वासियों का अपने बास्केटबाल टीम या बोस्टन मैराथन के लिए पैशन,प्राइड परेड के लिए पूरे शहर का इन्वाल्व्मेंट आदि बड़ा बनाता है|बोस्टन बहुत जीवंत शहर है यह नॉर्थ एंड की विज़िट से सिद्ध हो गया|ऐसे कोने किसी शहर की रूह होते हैं इन्हीं से शहर धड़कता है ऊर्जा से स्पंदित होता है|

1 Comment

  • Suprity Choudhury, June 9, 2022 @ 3:23 am Reply

    बहुत सुंदर वर्णन है। पड़कर नई जानकारियां भी मिली।

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