प्रेम जनमेजय

अदिति का कहना है –कविता हमारी नहीं सबकी हो ”

कुछ समय पूर्व इंदौर की युवा लेखिका अदिति सिंह भदौरिया की पहली पुस्तक ( काव्य संग्रह) खामोशियों की गूंज प्रकाशित हुई है। किसी नवोदित लेखक के लिए यह सबसे बड़ा प्रतिसाद है कि उनकी पुस्तक पर  प्रेम जनमेजय जैसे वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध साहित्यकार प्रतिक्रिया दें।

अदिति सिंह की पुस्तक पर जनमेजय जी की विशेष टिप्पणी-

अदिति का कहना है –कविता हमारी नहीं सबकी हो।”

मेरा भी मानना है कि बहुत आवश्यक है कि रचनाकार अपने समय को पहचाने। किसी भी वरिष्ठ रचनाकार के लिए भी आवश्यक है कि अपने से बाद कि पीढ़ी को ध्यान से पढ़े  और उसके माध्यम से अपने समय को जाने।  युवा रचनाकार को चाहिए कि उसे यदि प्रतियोगिया करनी है तो स्वयं से करे, निरन्तर स्वयं को बेहतर करना उसका लक्ष्य होना चाहिए।

यह मैंने अदिति में देखा है। साहित्य के आंगन में अठखेलियाँ करती मासूम -सी लड़की अचानक एक संजीदा रचनाकार बन गई है। इसका गवाह है उसका काव्य संकलन —खामोशियों की गूंज’

मैं उसमें आने वाले समय को देखता हूँ क्योंकि कभी अमेरिकी कवि फिलिप लेविन ने कभी कहा था–

Listen to these young poets and you’ll discover the voice of the present and hear the voice of the future before the future is even here. –

अदिति सिंह भदौरिया

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