डॉ.नंदिनी शर्मा’नित्या’

( हिन्दी में पीएचडी, सितार में बैचलर ऑफ म्यूजिक,कई साहित्यिक संस्थाओं की सदस्य, 40 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन)

कविता……….

चाहती हूँ

कुछ पल के लिए,कुछ क्षण के लिए

चाहती हूँ एकांत

कुछ समय अपने लिए अतिशेष चाहती हूँ

मैं अपने अक्स से रूबरू होना चाहती हूँ

उडना चाहती हूँ मैं भी,

एक आजाद पंछी की तरह चहकना चाहती हूँ

नीले,पीले,लाल,गुलाबी सतरंगी रंगों से

 भरना चाहती हूँ अपने सपनों में रंग

जीना चाहती हूँ उन पलो को जिन पर सिर्फ मेरा और सिर्फ मेरा हक हो

सारे रिश्ते नातो से परे मैं  सिर्फ अपने आप से बनाना चाहती हूँ 

एक प्यार भरा रिश्ता

अपने आप से पूछना चाहती हूँ,अपनी खैर खबर

अपनी ख्वाहिशों को

फिर से जीना चाहती हूँ

मै फिर से अपने आप को एक इंसान बना देखना

चाहती हूँI

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