मप्र हिसास का अनूठा आयोजन

इंदौर। लिखते समय सोचा नहीं जाता है जो मन में आता है वो शब्दों में काग़ज़ पर उतर आता है।हर इंसान , स्थान में एक कहानी होती है जिसे लेखक अपनी तरह लिखता है। रक्तदान दान नहीं है प्रवाह है जो हमारे द्वारा दूसरों में बहता है। ऐसे कुछ विचार व्यक्त किए विभिन्न विधा के तीन लेखकों डॉ अजय सोडानी, दीपक विभाकर नाइक एवं अंजलि मिश्रा ने मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन( हिसास) की इंदौर इकाई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में।

मैं सोच कर नहीं लिखता हूँ…डॉ सोडानी

अहिल्या पुस्तकालय में हुए कार्यक्रम में डॉ सोडानी ने अपनी किताब  सार्थवाह हिमालय ( यात्रा वृत्तांत)के बारे में कहा कि मैं सोच कर नहीं लिखता हूँ मन में जब बैचेनी होती है तो वो शब्दों में बाहर आ जाती है।किताब को पढ़ते हुए भाव पकड़ लेते हैं शब्द छोड़ देते हैं।मैं जंगल, पहाड़, आदिवासियों का दर्द लिखना चाहता हूं जो संविधान में भारत का नागरिक लिखे जाने से बहिष्कृत कर दिए गए हैं।

मेरा लेखन आध्यात्मिक यात्रा की तरह है…अंजलि मिश्रा

अपने पहले उपन्यास अनुमिता की लेखिका अंजलि मिश्रा ने कहा लिखने की रचना प्रक्रिया को बताना मुश्किल है। बाबा को पत्र लिखे, डायरी लिखी , जब अलग-अलग जगह लोगों से मिलना हुआ तो उपन्यास ने आकार लिया। मेरा लेखन एक आध्यात्मिक यात्रा की तरह है।

रक्तदान नहीं स्व रक्त प्रवाह दर्शन कहता हूं… दीपक विभाकर नाइक

रक्तदान के पर्याय बन चुके दीपक विभाकर नाइक ने आलेखों का संग्रह कर किताब ‘ वक़्त पर रक्त’  लिखी है। उन्होंने कहा यूँ तो हमारी संस्कृति में सोलह संस्कार है लेकिन मेरे लिए रक्तदान 17वां संस्कार है। विभिन्न रक्तसमूहों के 800 से ज़्यादा रक्तदाता इस पुनीत कार्य से जुड़ चुके हैं।उन्होंने कहा रक्तदान कहना उपयुक्त नहीं है क्योंकि जो दान कर दिया वो वापस नहीं लिया जाता , लेकिन रक्त का दान कर हम वापस रक्त पा लेते हैं, इसलिए मैं स्व रक्त प्रवाह दर्शन कहता हूं।

हिसास के अध्यक्ष डॉ राजेश नीरव ने कहा तीनों रचनाकार अपनी सीमाओं का उल्लंघन करते हुए ज्योत से ज्योत जला रहे हैं।सचिव महिमा वर्मा ने संस्था परिचयऔर गतिविधियों के साथ सदस्यों को परिचय दिया। । डॉ अमिता नीरव ने तीनों लेखकों का परिचय देते हुए संचालन किया, रश्मि चौधरी ने आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में पंकज दीक्षित,अमरवीर चड्ढा, रागिनी शर्मा , निशा चतुर्वेदी , संध्या रायचौधरी ,उषा शर्मा, माया क़ौल , सुषमा व्यास,कीर्ति राणा,ममता तिवारी, उषा गौर, रेखा अग्रवाल, रागिनी शर्मा, देवेन्द्र सिंह सिसोदिया, इंदिरा अग्रवाल सीमा गर्गे, शुभा प्रकाश जोशी आदि अन्य लेखक मौजूद थे।

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