पुस्तक “वक्त पर रक्त” का लोकार्पण

( रक्तदान के प्रति जनचेतना का विनम्र प्रयास)

इंदौर. सामाजिक सरोकार के लिए हम जो भी करते हैं वह हमें कई गुना बढ़ कर वापस मिलता है। अच्छी बातों का प्रचार प्रसार होता रहे तो लोग प्रेरणा लेते हैं। इस तरह की पुस्तकें समाज को रचती हैं, मानवता को रचती है। यह बात मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने इंदौर के रक्तदीप दीपक विभाकर नाईक की पुस्तक ‘वक़्त पर रक्त’ के लोकार्पण समारोह में कही।मुख्य अतिथि उपायुक्त सपना शिवाले सोलंकी ने कहा कि रक्तदान करना एक सच्ची खुशी है और उसे पाने के लिए दीपक जी जैसा बनना पड़ेगा। स्टेट ऑफ आर्ट मॉडल ब्लड बैंक, एम वाय अस्पताल के प्रमुख डॉ.अशोक यादव ने कहा कि रक्तदान अंगदान से कम नहीं है, दीपक जी रक्तदाता बिना शोर शराबे और बिना दिखावे के रक्तदान करते हैं। वे अब तक 127 बार रक्तदान कर चुके है और उसमें से 70 बार से अधिक रक्तदान एम वाय अस्पताल में किया हैं।

‘वक़्त पर रक्त’ दीपक विभाकर नाईक के जीवन को आईने की तरह दिखाती है। आज के समय में सेवा प्रकल्प रूपी प्रकाश को समाज में फैलाना ही इस पुस्तक का संदेश है। पुस्तक देश के जाने माने 33 लेखकों के आशीर्वचन, संस्मरण, लघुकथाओं और कविताओं से सजी है जो किसी न किसी तरह से दीपक के समाज सेवा प्रकल्प समाज के समक्ष प्रस्तुत करते हैं। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के पत्रकारिता विभाग में हुए इस कार्यक्रम में शहर के अनेक साहित्यकारों, समाजसेवियों ने शिरकत की।

पुस्तक की प्रसंग वक्ता डॉ. गरिमा संजय दुबे ने अपने वक्तव्य में कहा कि इंसान एक चलता फिरता ब्लड बैंक है, यदि हम ठान लें कि हम रक्तदान करेंगे ही तो कभी किसी अस्पताल में रक्त की कमी ही न होगी।

अतिथियों का शब्द स्वागत दीपक विभाकर नाईक द्वारा किया गया।कार्यक्रम का संचालन अनावि नाईक ने किया और सरस्वती वंदना हर्षिता दवे द्वारा प्रस्तुत की गई। रूही नाईक ने अतिथियों का आभार माना।

33 लेखकों ने अपने विचार अभिव्यक्त किए हैं

पुस्तक की भूमिका किसी एक ने नहीं लिखी, बल्कि कुछ विशेष महानुभावों के सामाजिक संदर्भ में विचारों  को विशेष तौर पर समाहित किया गया।इनमें डॉक्टर विकास दवे, प्रकाश हिंदुस्तानी, सपना शिवाले सोलंकी,अनघा जोगलेकर,सिंधु कन्होआ,जितेंद्र व्यास, सदाशिव कौतुक,मनीष वैद्य आदि कई प्रमुख लेखकों के विचार हैं। वहीं  प्रदीप नवीन, दीपा व्यास, रश्मि चौधरी, सुषमा व्यास राजनिधि, विवेक हिरदे, सुषमा दुबे, पिंकी तिवारी, मंजुला भूतड़ा,सीमा व्यास,,वसुधा गाडगिल समेत 33 लेखकों ने अपने विचार अभिव्यक्त किए हैं।

 

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