श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी वर्ष के अंतर्गत देश भर में वर्षपर्यंत होंगे साहित्यिक – सांस्कृतिक आयोजन

 

इंदौर । अपने वैविध्यपूर्ण, उत्कृष्ट और गहरी सोच के लेखन से साहित्य प्रेमियों के दिलों पर राज करने वाले, देश के सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित श्रीयुत श्रीनरेश मेहता जी का ये जन्म शताब्दी वर्ष है. पूरे देश में इस अवसर पर विशेष आयोजन वर्ष पर्यन्त होंगे। इंदौर और मध्यप्रदेश के कई शहरों में अपने जीवन की साँझ गुजारने वाले नई कविता के इस शिखर पुरुष के शताब्दी समारोह के लोगो का विमोचन प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कर प्रदेश की ओर से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए. शुभंकर चिन्ह के लोकार्पण अवसर पर इस समारोह के सहभागी मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे, श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति के मंत्री श्री अरविन्द ओझा एवं श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी समारोह समिति के संयोजक श्री आलोक बाजपेयी विशेष रूप से उपस्थित थे.

म.प्र साहित्य अकादमी के विशेष आयोजन मेहता जी स्मृति को समर्पित प्रकाशन भी होंगे

इस अवसर पर श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी समारोह में पूरी ऊर्जा और समर्पण से जुड़े साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कहा कि अकादमी का प्रयास होगा कि वर्ष भर इस प्रसंग पर चर्चा जारी रहे. इस उद्देश्य के लिए अकादमी वर्षपर्यंत अकादमी के आयोजनों में यह लोगो इस्तेमाल करेगी। श्रीनरेश मेहता जी को समर्पित साहित्य अकादमी के विशेष आयोजन तो होंगे ही, स्मृति को समर्पित प्रकाशन भी होंगे।

साहित्य अकादमी जन्म शताब्दी समारोह से पूरी तरह सम्बद्ध है. देश की सबसे पुरातन साहित्यिक संस्था श्री मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति भी जन्म शताब्दी समारोह में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निबाहेगी। समिति के प्रचार मंत्री एवं जन्म शताब्दी समारोह के पदाधिकारी अरविन्द ओझा ने कहा कि श्रीनरेश मेहता जी का मध्य भारत और इंदौर से अभिन्न नाता रहा. वे उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ के प्रमुख रहे तो इंदौर में समाचार पत्र के संपादक भी. सुपुत्रशोक के बाद इंदौर छोड़ने के बाद भी जब वे अंतिम बार इंदौर आए, तब भी समिति के सभागार में ही उन्होंने श्री हरेराम बाजपेयीजी की पुस्तक का विमोचन एवं काव्यपाठ किया। श्री मध्यभारत हिन्दी साहित्य समिति जन्म शताब्दी समारोह से श्रद्धा के साथ जुड़ी है. समिति श्री मेहता की स्मृति में विशेष आयोजन के अलावा देश की सबसे पुरानी साहित्यिक पत्रिका – वीणा का विशेषांक भी उन्हें समर्पित करेगी।

श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी समारोह साहित्य जगत के लिए पितृ ऋण चुकाने जैसा

केंद्रीय समिति के संयोजक बहुविध संस्कृतिकर्मी श्री आलोक बाजपेयी ने बताया कि श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी समारोह की केंद्रीय समिति की अध्यक्ष उनकी सुपुत्री श्रीमती वान्या मेहता वोरा हैं, जबकि महासचिव उनकी पुत्रवधु श्रीमती वंदना ईशान मेहता हैं. समारोह की मुख्य आशीर्वादप्रदाता उनकी जीवनसंगिनी  श्रीमती महिमा श्रीनरेश मेहता है. इस समिति से सम्पूर्ण देश के कोने -कोने से प्रमुख साहित्यकार एवं संस्कृतिप्रेमी जुड़े हैं. देश के हर हिस्से में जन्म शताब्दी समारोह के अंतर्गत साहित्यिक आयोजन साहित्यप्रेमी स्वतःस्फूर्त ढ़ंग से मेहताजी के प्रति पूरे आदर भाव के साथ कर रहे हैं, जैसे – दिल्ली के आयोजन की कमान अशोक बाजपेयी जी सँभाल रहे हैं, भोपाल में कैलाशचंद्र पंत जी, प्रयागराज में लोकभारती प्रकाशन के रमेश ग्रोवर जी तो उज्जैन में डॉ. शैलेन्द्र कुमार शर्मा. इसी तरह देश के विभिन्न राज्यों में साहित्यप्रेमी अपना सम्मान प्रकट करने के लिए आयोजन कर रहे हैं. इसके अलावा श्रीनरेश मेहता के लिखे नाटकों, रेडियो नाटकों और कविताओं की नाट्य प्रस्तुतियों पर आधारित नाट्य समारोह का आयोजन भी किया जायेगा। श्रीनरेश मेहता की कविताओं या उनकी विषय वस्तु पर केंद्रित एक पेंटिंग प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी जिसमें देश के प्रमुख चित्रकारों के काम शामिल होंगे। इस प्रदर्शनी के साथ ही चित्र प्रदर्शनी, पाण्डुलिपि प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी। श्रीनरेश मेहताजी के वीडियो साक्षात्कार, वृत्तचित्र एवं ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग्स पर आधारित फ़िल्म प्रदर्शन भी होंगे। श्री बाजपेयी ने कहा युवा पीढ़ी को श्रीनरेश जी की कविताओं से जोड़ने के उद्देश्य से कुछ स्वनाम धन्य हस्तियों के प्रोडक्शन भी जन्म शताब्दी समारोह में किए जाएंगे। उन्हें आदरांजलि देना साहित्य जगत का कर्तव्य हैं तथा उनके आयोजनों, प्रकाशनों से सभी साहित्यप्रेमी जुड़ सकते हैं. श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी समारोह साहित्य जगत के लिए पितृ ऋण चुकाने जैसा हैं.

ज्ञानपीठ सहित साहित्य के सभी उच्च सम्मान से सम्मानित

अपनी विशिष्ट शैली से देश में कविता कहने की नई व्यंजना, संवेदनशीलता, बिम्बों और दर्शन की अनछुई ऊँचाइयाँ प्रदान करने वाले श्रीयुत श्रीनरेश मेहता जी “दूसरे सप्तक” के माध्यम से देश के साहित्याकाश पर छा गए थे. कविता के साथ आपने कथा, उपन्यास, नाटक की अनेक विधाओं, सम्पादकीय यानी कि सभी माध्यमों में अनुपम साहित्य रचना की. वे सस्वर वाचन करते तो दर्शक सुधबुध भूलकर उनके अंदाज़ में खो जाते और जब अकेले में उन्हें पढ़ते तो उनके विचारों की हिमालयीन उच्चता चकित करती। शाजापुर में एक शताब्दी पूर्व जन्मे श्रीनरेश मेहता जी मध्यप्रदेश के बिरले और संभवतः इकलौते साहित्यकार रहे जिन्हें तार सप्तक में स्थान, साहित्य अकादमी सम्मान, भारत भारती और ज्ञानपीठ पुरस्कार आदि सभी एक साथ प्राप्त हुए. श्रीनरेश मेहता जन्म शताब्दी समारोह के लोगो का विमोचन करते हुए प्रदेश के महामहिम राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल  ने कहा कि श्रीनरेश मेहता जी ने मध्यप्रदेश का नाम रौशन किया है. साहित्य जगत की इस महान विभूति का स्मरण करना, उनके व्यक्तित्व -कृतित्व पर चर्चा और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करना सभी का कर्तव्य है.

 

श्री नरेश मेहता का रचना संसार

कितना अकेला, प्रथम फाल्गुन, अरण्य, उत्तर कथा,दो एकांत, बोलनो दो चीड़ को,एक समर्पित महिला,वनपाखी, आखिर समुद्र से तात्पर्य,कितना अकेला आकश …आदि.

 

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