डॉ दविंदर कौर होरा

जन्म – 17 फरवरी

डिप्लोमा- कंप्यूटर एप्लीकेशन

संचालिका – कोचिंग क्लासेस

संपादक – काव्य कुंज – त्रैमासिक पत्रिका की प्रधान संपादक

 उपाध्यक्ष – साहित्य कलश , इंदौर, संस्कार भारती,इंदौर, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ,उज्जैन

मेम्बर – इंदौर साहित्य सागर ,  इंदौर लेखिका संघ

लेखन – हिंदी, अंग्रेजी, पंजाबी में

विधा -: कहानियां ,कविताएं ,ग़ज़ल, लघुकथा एवं लेख

 रविवार डाइजेस्टिव , अर्पण- समर्पण, वागर्थ, शुभ तारिका, सहित अन्य पत्र – पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशन

टेलीविज़न पर कविताओं और वार्ताओं का प्रसारण

 संकलन में प्रकाशित – :

भारत  के श्रेष्ठ हिंदी रचनाकार 

,इक्कीसवी सदी की श्रेष्ठ हिन्दी कविताऐं

21 वीं सदी के श्रेष्ठ कवि एवं कवियित्रियां,

 शतरूपा, ज्योतिका,अखंड काव्यधारा,काव्य रंग होली के संग आदि संकलन में रचनाएं प्रकाशित

सम्मान और अलंकरण -:

” शारदा सम्मान “2011 रावतभाटा , कोटा द्वारा

 “बाल्मीकि सम्मान “महर्षि बाल्मीकि महिला शक्ति संगठन, इंदौर द्वारा

” तेजस्विनी सम्मान”-संस्था तेजस्विनी दुर्गा वाहिनी ,इंदौर द्वारा

 “सिंधु श्री अलंकरण “साहित्य कलश, म. प्र.  द्वारा

 विशिष्ट हिंदी सेवी सम्मान   जे. एम. डी. पब्लिकेशन दिल्ली द्वारा

 “साहित्य शिरोमणि अलंकरण 2013″विक्रम शिला हिंदी विद्यापीठ ,भागलपुर द्वारा

“राष्ट्र भाषा गौरव ” (मानद उपाधि)  2014 अखिल भारतीय हिंदी सेवी संस्थान इलाहाबाद द्वारा

विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर द्वारा  “मालव रत्न अलंकरण “2015

 राष्ट्रीय मासिक पत्रिका, “धारा” इंदौर द्वारा ” डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान” 2015

 पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी , शिलांग द्वारा संपादक रत्न सम्मान – 2016

 हिंदी सेवा समिति,  मध्य प्रदेश द्वारा “सिंहस्थ सम्मान”  – 2016

“स्वतंत्र सम्मान 2017”

नव सृजन लोक मंच, इंदौर द्वारा  इंदौर साहित्य सागर संस्था , इंदौर द्वारा”कलम कलाधर सम्मान ” 2017

ग्वालियर साहित्य कला परिषद, ग्वालियर द्वारा ” साहित्य सुरभि 2017 “, ” काव्य क्रांति सम्मान “

इंदौर साहित्य सागर संस्था , इंदौर द्वारा” कलम वीर सम्मान ” 2017″, पंच परमेश्वर सम्मान – 2018

साहित्य संगम संस्थान, दिल्ली द्वारा के. बी. संपादक श्री सम्मान – 2018

के. बी. हिन्दी साहित्य समिति, बदायूँ द्वारा ” शकुन्तला माथुर स्मृति सम्मान ” 2018, हिन्दी सेवा सम्मान ” 2018

के. बी. हिन्दी साहित्य समिति, बदायूँ द्वारा ” राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना , उज्जैन द्वारा “महिला गौरव सम्मान “- 2018

  (महा अलंकरण सम्मान)

सुरभि साहित्य संस्कृति अकादमी, खंडवा द्वारा ” काव्य कौस्तुभ ” मानद उपाधि 2019 साहित्य मंडल श्री नाथद्वारा, राजस्थान द्वारा

“ए पी जे अब्दुल कलाम   राष्ट्रीय अवार्ड 2020

  स्वर्ण भारत परिवार द्वारा  ” ग्लोबल गांधी पीस अवार्ड 2020″ –

  स्वर्ण भारत परिवार द्वारा कहानियां पुरस्कृत – सम्मानित

 महंगाई बैरन – कहानी

 राष्ट्रीय पुस्तक मेला , नई दिल्ली द्वारा  प्रायश्चित- कहानी   पुरस्कार

 सहजीवन आशादीप फाऊंडेशन, इंदौर द्वारा नवसृजन कला प्रवीण अवार्ड 2021

  छत्रपति प्रशिक्षण संस्थान, कानपुर द्वारा    भूख – लधुकथा सामाजिक आक्रोश ,सहारनपुर द्वारा  प्रमाण पत्र शोध पत्र पर

” मूल्यों के प्रसार में शिक्षकों की भूमिका ” 2016  विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया

अंतरराष्ट्रिय शोध संगोष्ठी , उज्जैन विषय – ” नारी- कल, आज और कल पर शोधपत्र प्रस्तुत किया

गोल्डन बुक ऑफ द अर्थ में बायोग्राफी शामिल हुई है |

संपर्क 24/2नार्थ राजमोहल्ला, इंदौर ,452002

मोबाइल 9827451260

            जागो, वक्त बदल रहा है

“हाय मॉम.., हाउ आर यू..?  स्नेहा की वीडियो पर खनकती आवाज़ |

स्नेहा अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है |

“हैल्लो ब्रो, व्हाट्सअप, हाउ इज मम – पा? हाउ इज़ गोईंग यूअर स्टडी ?

ये कनिका ऑस्ट्रेलिया में इंटरनेशनल कंपनी में सी ई ओ है ये घर की बड़ी बेटी है और अपने परिवार का ना केवल पालन -पोषण कर रही है, बल्कि भाई को पढ़ा लिखा कर उसका भविष्य संवारने का जिम्मा भी इसने अपने कंधों पर लिया है |

“हल्लो छुटकी, आई सेंड मनी | घर का सामान और मां की दवाइयां ले आना | तेरी पसंद की ड्रैस सेंड कर दी है | तुझे पार्सल दो – तीन दिनों में मिल जाएगा|

ये छाया है | लंदन में अपनी पढ़ाई के साथ जॉब करके घर घर चला रही है |आज ना केवल महानगरों में वरन छोटे शहरों में भी ये दृश्य हमें दृष्टिगोचर होता रहता है |

ये सभी बच्चे कभी किसी छोटे शहर के किसी गांव – कस्बे में साधारण सी कॉलोनी के दो कमरों के घर में रहते होंगे और सरकारी या मोहल्ले के स्कूल में पढ़े होंगे |  आज अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन, लंदन सहित सभी बड़े देशों में ना केवल पढ़ रही हैं वरन अच्छी जॉब करके हमारे देश के नाम का परचम फहरा रही हैं |

एक समय था जब घूंघट की ओट से, आधे से अधिक चेहरा छुपा कर और नजरें झुका कर बात करने में भी महिलाएं सकुचाती थीं |  अब तो ग्रामीण श्रेत्रों में भी बदलाव की मीठी बयार बह रही है | मनोरंजन व संचार के साधनों यथा – टेलिविजन, मोबाइल, इंटरनेट ने बड़े शहरों से ना केवल इनकी दूरी को कम किया है अपितु ग्यान की गंगा को घर -घर बहा दिया है |आज की स्त्री ने यह साबित कर दिया है कि वह अब किसी भी दौड़ में किसी से कमतर नहीं है, बल्कि बेहतर है |

नारी ना तो वस्तु है, ना ही दया की पात्र है | आज की नारी ना केवल घर की हर जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही है वरन बैंक  रेल्वे, एयर फोर्स से लेकर डॉ. इंजीनियर, फायनेंस कंपनी तक की जिम्मेदारी अपने कंधे पर हंस कर उठा रही हैं |

 

1 Comment

  • Dr. Hora, March 15, 2022 @ 6:17 am Reply

    Nice

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