mediapalten ओपन माइक की सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर व्यक्त की अपनी मन की भावनाएं …अपनी लेखनी के माध्यम से…

 

नारी है बढ़कर

सपना सी.पी.साहू “स्वप्निल”

सृजनकरणी सबसे बढ़कर,

नारियाँ जग बनाती बेहतर।

मुखड़ा सुंदर, मन भी सुंदर,

द्वैष न धारे वे उर के अंदर।

सह लेती सब पीड़ा-अभाव,

नहीं पालती बदले का भाव।

बार-बार नहीं जिद्द पर अड़ती,

परिस्थिति अनुरूप ही चलती।

न छेड़ती, न ही पीछे पड़ती,

वे अपमानित करने से बचती।

चौराहों पर न बस्ती बसाती,

आते-जातो को नहीं सताती।

शक्ति से प्रताड़ित न करती,

अभद्र टिप्पणियाँ न कहती।

ठुकराने से न कुण्ठा लाती,

न ही वे कोई चेहरे जलाती।

न कोई संग हथियार रखती,

कोसों दूर विध्वंस से रहती।

निर्माण की परिभाषा गढ़ती,

वास्तुकारिणी, रचती रहती।

अपनी बोली न लगवाती,

किसी से न दहेज मांगती।

रोब से न कुछ हथियाती,

पराये घर को वे अपनाती।

देरी पे प्रश्नचिन्ह नहीं लगाती,

बस, चौखट पर राह ताकती।

जीवन पथ में संगिनी होती,

वे सारे रिश्ते-नाते निभाती।

पीड़ा सहकर भी मुस्कुराती,

प्रेमरूपी वे खुशियाँ लुटाती।

वे अपनी दुनिया में हर्षाती,

स्वयंसिद्धाएं, भला चाहती।

नारी में सिमटा है पूरा ब्रम्हांड

रश्मि सक्सैना

मैं हूँ एक नारी

जिसमें सिमटा है पूरा ब्रम्हांड ।

सूर्य सी तेजस्विता ,

चंद्रमा की शीतलता ,

फूलों सी कोमलता ,

हूँ पेड़ सी मजबूत ,

पहाड़ सी अटल ,

गगन की तरह विशाल ,

मन है मेरा-

नदी सा निर्मल ,

पावन गंगा सा

मत समझ कमजोर मुझे

पीकर अपने आँसू

देतीं हूँ सबको खुशी

अपने ख़्वाबों को दिल मे दबा

करती हूँ मदद अपनों के सपने पूरा करने में

दुःख में भी सुख को तलाशती हुई

अपनों से छलने पर भी

धरती के समान

प्रेम से सबको गले लगा

लहलहाती हूँ

मुस्कुराती हूँ

नारी

डॉ. नंदिनी शर्मा ‘ नित्या ’

तुम कलयुग की नारी हो

तुम्हें स्वयं ही उनसे लडना होगा

पापाचार का विध्वंस कर

अपना अस्तित्व बचाना होगा

नहीं आयेंगे

श्रीराम बचाने

नहीं कोई घनश्याम

सीता,द्रौपदी और निर्भया

नवजन्मी से प्रियंका तक

नहीं अंत

तुम्हारी पीडा का

सदियों से

इतिहास गवाह है

बलशाली ने तुमको ही छला है

आज की नारी

नहीं बेचारी

लेगी प्रतिशोध

करे तैयारी

हैवानों की बस्ती में अब

अपना अस्तित्व बचाना होगा

लक्ष्मी नहीं काली बनकर

अब खडग अपना उठाना होगा

हैवानों को बीच सडक पर

तिल-तिल तुम्हें जलाना होगाll

नारी

शोभा रानी तिवारी,

नारी  है जग का गौरव, विश्व की पहचान है ,

झांसी की रानी ,मदर टेरेसा ,नारी हिंदुस्तान है।

नारी तो है शक्ति स्वरूपा ,मां दुर्गा रुद्राणी है,

सृष्टि की सृजनकर्ता,वही जग की कल्याणी है,

परिवार के नींव का पत्थर जानी है पहचानी है,

सहनशीलता का गुण है,और ओजस्वी वाणी है,

एक ,दो, नहीं उसमें ,असंख्य गुणों की खान है,

झांसी की रानी ,मदर टेरेसा नारी हिन्दुस्तान है।

ऊंचाई पर जाने से पहले ,अपने पैर जमाती है गहराई में जाने से पहले

,उसकी थाह लगाती है कर्तव्यों का ताना-बाना बुनकर फ़र्ज़ निभाती है,

रिश्तो में मिठास लाने ,वह सूत्रधार बन जाती है,

स्वावलंबी,परोपकारी दोनों कुल का अभिमान है,

झांसी की रानी ,मदर टेरेसा ,नारी हिन्दुस्तान है।

जीवन की संजीवनी ,तूफानों में दीप जलाती है,

हर क्षेत्र में आगे बढ़कर , वह परचम लहराती है,

नारी के अनेक रूप हैं, ,हर रूप में  ढल जाती है,

हौसलों से उड़ान भरकर, अपनी मंजिल पाती है,

इस धरती पर नारी, कुदरत का दिया  वरदान है,

झांसी  की रानी ,मदर टेरेसा ,नारी हिन्दुस्तान है।

नारी नहीं अबला उसकी शक्ति दिखाना है”

आशा जाकड़

नारी नहीं अबला उसकी शक्ति दिखाना है

कहने और सुनने का यह रिश्ता पुराना है।।

बेटी बनी , बहना, बहू  बनी  फिर माँ ,

चुप-चुप सहा उसने कुछ न कहा उसने।

आंसुओं के मोतियों को व्यर्थ में न गिराना है,

नारी नहीं अबला उसकी शक्ति दिखाना है ।।

नारी निकली घर से पहुंँची है संसद  तक ,

चौके चूल्हे को छोड़ पहुंँची है अंतरिक्ष तक।

जमीं  पर रहकर ही आकाश को पाना है ।

नारी नहीं  अबला,उसकी शक्ति दिखाना है।।

हर क्षेत्र में देखो नारी निकली है नर से आगे ,

घर हो या बाहर हर जिम्मेदारी को पूरा संभाले।

मिलजुल कर जीवन की गाड़ी को चलाना है।

नारी नहीं अबला ,उसकी शक्ति दिखाना है ।।

पढ़ी-लिखी होने पर भी पुरुष से कम आंकी जाती,

दहेज दानव के कारण भ्रूण हत्याएँ भी की जाती ।

अत्याचार की शिला को अब हमको हटाना है।

नारी नहीं अबला , उसकी शक्ति दिखाना है।।

आंँखों में आंँसू लेकर औरों को खुशियांँ देती,

त्याग , दया की देवी पल – पल जीती  मरती।

अपने जिगर के दर्द को दामन में न छुपाना है।

नारी नहीं अबला  उसकी शक्ति दिखाना है।।

 

1 Comment

  • आशा जाकड़, March 12, 2022 @ 4:18 pm Reply

    नारी तेरे रूप अनेक

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