हेल्थ डेस्क। देश में इन दिनों अच्छे कार्यों की बुरी आलोचना करने का प्रचलन बढ़ गया है। राजनीति में तो यह काफी निचले स्तर पर पहुंच गया है। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ही लीजिए। ऑस्ट्रेलिया से शिक्षित इस युवा ने सत्ता के लोभ में झूठ फैलाने का बीड़ा उठा लिया है।

कोरोना की जो दो वैक्सीन भारत में है उसे वह भाजपा का वैक्सीन कह रहे हैं साथ में यह भी कह रहे हैं कि वे टीका नहीं लगवाएंगे। आश्चर्य तो यह है कि कांग्रेस के कई सीनियर नेता अखिलेश के स्वर में स्वर मिला रहे हैं। भ्रम बहुत खतरनाक ढंग से फैलाया जा रहा है। वैक्सीन से नपुंसक होने का डर बैठा कर भाजपा को घेरा जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा था कि जो सरकार ताली और थाली बजवा रही थी, वो वैक्सीनेशन के लिए इतनी बड़ी चेन क्यों बनवा रही है, ताली और थाली से ही कोरोना को भगवा दें ना… उन्होंने कहा था, वो अभी कोरोना वायरस की वैक्सीन नहीं लगवाएंगे क्योंकि उन्हें बीजेपी की वैक्सीन पर भरोसा नहीं हैं…

अब इस मामले का विरोध तो होना ही था सो वो तो हो ही रहा है मगर दुखद ये कि इस मामले पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी अपने सुर मिला दिए और अखिलेश की बात का समर्थन कर डाला वहीं र्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंजूरी देने पर सवाल खड़े किए हैं।

आशुतोष सिन्हा ने भी दिया विवादित बयान
अखिलेश यादव के सवाल उठाए जाने के बाद पार्टी के नेता और एमएलएसी आशुतोष सिन्हा ने भी विवादित बयान देकर पार्टी की मुश्किल और बढ़ा दी। आशुतोष सिन्हा ने कहा कि बीजेपी सरकार द्वारा लाई जा रही वैक्सीन से कुछ भी हो सकता है। यह भी हो सकता है कि वैक्सीन आपको नपुंसक बना दे। उन्होंने अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि अगर अखिलेश ने वैक्सीन न लगाने की बात कही है तो जरूर इसके पीछे कोई गंभीर तथ्य होगा।

वहीं इस विवाद पर ड्रग्‍स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) को आगे आना पड़ा और उसने इसे बकवास बताया है और इस तरह की अफवाहों से बचने की सलाह दी है, डीसीजीआई के कहा कि जिन दो वैक्सीन को मंजूरी दी गई है वह 110 प्रतिशत पूरी तरह से सुरक्षित हैं, उन्होंने कहा कि अगर वैक्सीन की सुरक्षा को लेकर जरा भी चिंता होती तो वे इसके इस्तेमाल की इजाजत नहीं देते।

अफवाहों का बाजार गर्म
वहीं कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को गंभीर बीमारी मीजल्स रूबेला का टीका लगाने के अभियान की शुरुआत की थी लेकिन इस टीकाकरण अभियान को कई मुस्लिम इलाकों में विरोध का सामना करना पड़ रहा था। इसी प्रकार की खबरें सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़ से भी आई थीं।

फैल रहे व्हाट्सऐप संदेशों ने ऐसे अभियनों का काफी नुकसान किया, बताते हैं कि इन संदेशों में कोई पुरानी क्लिप होती है जैसे केरल की और उससे भ्रम फैलाया जाता है. यही दिखाते हैं कि इस टीके से बच्चे की मृत्य हो गई या फिर आगे चल कर नपुंसकता आ जाएगी, इन संदेशों का नकारात्मक असर पड़ता है।

क्या मुसलमानों के खिलाफ कोई इंजेक्शन तैयार किया गया है?
ऐसे मामलों की फेहरिस्त लंबी है, करीब 4 साल पहले भी सोशल मीडिया पर घूम रहे एक मैसेज के जरिए दावा किया जा रहा था कि हिंदुस्तान में मुसलमानों को नपुंसक बनाने के लिए एक इंजेक्शन तैयार किया गया है और दावे के मुताबिक ये इंजेक्शन बीमारी से बचाने के बहाने स्कूलों में मुसलमान बच्चों को लगाया जा रहा है? क्या मुसलमानों के खिलाफ कोई इंजेक्शन तैयार किया गया है? क्या सुई के सहारे खून में उतरने वाली कोई दवा मुस्लिमों को नपुंसक बनाने की साजिश है? ऐसे सवाल सामने आए थे। मैसेज में दावा किया गया था नपुंसक बनाने वाला टीका स्मॉल पॉक्स के नाम पर दिया जा रहा है, जबकि सच्चाई ये है कि टीके का स्मॉलपॉक्स से कोई लेना देना नहीं है।

Polio Vaccine को लेकर तो कई मामले सामने आए थे
जब भारत में पोलियो वैक्सीन लगाने का फ़ैसला किया गया था, तब भी धार्मिक आधार पर उसका विरोध किया गया था इस देशव्यापीअभियान की सफलता में देरी इसी वजह से लगी, क्योंकि धार्मिक अंधविश्वास के हिमायती मौलवियों ने मुस्लिम समाज से टीकाकरण के विरोध की अपीलें लगातार जारी की थीं, अगर ऐसा नहीं होता, बहुत पहले ही भारत को पोलियो से मुक्ति मिल गई होती। वहीं ताजा घटनाक्रम में कोरोना मामले सामने आने के बाद जब स्वास्थ्य विभाग की टीमें जांच के लिए जा रही थीं, तब देश के कई शहरों में उनके साथ मारपीट की गई थी।

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