विजय रांगणेकर

ऐसा प्रतीत होता है कि विदेशी आईपीएल खिलाड़ी आईपीएल टूर्नामेंट को बस दुधारू गाय मान कर ओपचारिकता निभाने, ऊर्जा बचकर रखने और महज मनोरंजन के लिए खेलते हैं। अपना वास्तविक खेल तो अपने देश की प्रतिष्ठा के लिए खेलते हैं। आईपीएल की नीलामी में बड़ी राशि प्राप्त कर बस औसत प्रदर्शन करते है। स्टीव स्मिथ, एरान फिंच, मैक्सवेल और हेजलवूड का प्रदर्शन वर्तमान में चल रही एक दिवसीय मैचों की श्रुंखला में देखें और उनकी तुलना आईपीएल में करें तो यह तथ्य रेखांकित हो जाता है। इन खिलाड़ीयों ने आईपीएल में खुद को थकान से बचाते हुए और चोटिल होने का जोखिम नहीं उठाते हुये भारत के विरुद्ध श्रंखला के लिए खुद को फिट रखा।

राजस्थान रायल्स के लिए खेलने वाले स्टीव स्मिथ ने आईपीएल में 3 अर्धशतकों के साथ 311 रन बनाए, जबकि वर्तमान एक दिवसीय श्रंखला के पहले दो मैचों में ही दो शतक जमाते हुए 209 रन बना लिए थे। एरान फिंच ने रायल चेलेंजर्स बंगलोर की ओर से खेलते हुए 12 मैच में महज 268 रन बनाए लेकिन इस श्रंखला के 3 मैच में वे 249 रन बना चुके हैं जिसमे एक शतक शामिल है। ग्लेन मैक्सवेल आईपीएल में एक एक रन के लिए तरस गए थे और 11 मैचो में मात्र 108 रन ही बना सके थे और इस श्रंखला में दो चमकदार पारी में 225 स्ट्राईक रेट से इतने ही रन बना चुके है। हेजलवूड चेन्नई सुपर किंग्स के लिए 3 मैच खेले और उन्हे मात्र एक विकेट मिला था लेकिन वर्तमान श्रंखला में तीन मैचो में वे 6 विकेट ले लिए है। पहले मैच में उन्होने भारतीय टीम के मध्य क्रम को तहस नहस कर दिया तो दूसरे और तीसरे मैच में विराट कोहली का महत्वपूर्ण विकेट लिया है।

यह समय है कि आईपीएल टीमों के प्रायोजक फ्रेंचाइजी इन विदेशी खिलाड़ियों को अगली नीलामी में काम प्राईस आफर करें और उनके लिए ज्यादा रुपयों की बोली बिल्कुल नहीं लगाएं। नाम चाहे जो भी हो। आईपीएल की बोली का आधार पिछले आईपीएल का प्रदर्शन होना चाहिए न कि उनका अन्यत्र प्रदर्शन या प्रतिष्ठा। सभी फ्रेंचाइजी को इस पर निर्णय लेना चाहिए ताकि ये विदेशी खिलाड़ी आईं पी एल को महज मनोरंजन के लिए न ले। यदि ऐसा एक बार किया गया तो सब विदेशी खिलाड़ी लाइन पर आ जायेंगे और इस टूर्नामेंट को गंभीरता से लेने लगेंगे।

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